कृषि मंडी में नीलामी के दौरान अशासकीय कर्मचारी काट रहे अनुबंध दिखाई नहीं दे रहे जिम्मेदार

पथरिया – कृषि उपज मंडी पथरिया में आए दिन अनियमितताएं सामने आ रहीं हैं यहां पर अधिकारियों की मनमानी के चलते वाजिब अधिकारियों कर्मचारियों से उनके कार्य न करा कर अपनी मनमर्जी से प्राइवेट तौर पर काम कर रहे लोगों द्वारा कार्य कराए जा रहे हैं ऐसा ही एक मामला सामने आया है पथरिया कृषि उपज मंडी का जहां प्राइवेट तौर पर कार्य कर रहे कर्मचारियों द्वारा अनुबंध की रसीद कटवा रहे हैं जबकि यह कार्य कृषि उपज मंडी में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक का होता है लेकिन यहां पर मंडी सचिव की मनमानी के चलते अनुबंध कटाने का कार्य प्राइवेट कर्मचारियों से कराया जा रहा है जब इस संबंध में हमने मंडी सचिव कुंज बिहारी बघेल से बात की तो पहले तो वह गोलमोल जवाब देते हुए नजर आए बाद में उन्होंने कहा कि हां प्राइवेट कर्मचारियों से भी यह कार्य कर सकते हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कृषि उपज मंडी के सुरक्षा गार्ड अपना वास्तविक काम न करते हुए नीलामी के दाैरान अनुबंध पत्रक बनाने का काम कर रहे हैं। इससे न केवल मंडी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हाे रहे हैं, बल्कि जिन्हें अनुबंध पत्रक बनाने की जिम्मेदारी दी है वे अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहे हैं। और प्राइवेट कंपनियों को नीलामी के दाैरान अनुबंध पत्रक बनाने के अलावा अन्य कामाें में लगाया जा रहा है। जबकि नीलामी में मंडी के कर्मचारियों को ही अनुबंध पत्रक बनाना चाहिए। यदि गार्डों से किसी किसान की उपज के दाम में लिखने में कोई गलती हो जाए, तो इसका जवाबदार कौन होगा यह भी एक बड़ा सवाल है। नीलामी के दाैरान मंडी में बहुत भीड़ हाे जाती है। भीड़ न लगे तथा अव्यवस्था न हाे, इसके लिए सुरक्षा गार्डाें काे तैनात किया जाना चाहिए, ना की उनसे अनुबंध पत्रक बनवाना चाहिए। भीड़ अधिक हाेने से व्यापारियाें काे नीलामी के दाैरान कई परेशानियाें का सामना करना पड़ता है।
कृषि उपज मंडी में जो सुरक्षा गार्ड हैं वह यूनिफार्म भी नहीं पहनते, जिससे भीड़ में इन्हें पहचानना मुश्किल हाे जाता है। कई बार जरूरत पड़ने पर किसानाें की भीड़ में गार्डाें काे पहचान पाना संभव नहीं हाेता।

आखिर वे कर्मचारी कहां हैं, जो नीलामी के दौरान अनुबंध की बुकों को लेकर साथ चलते हैं। उपज किस व्यापारी ने किस भाव में खरीदी, यह मंडी के अधिकृत कर्मचारियाें काे ही लिखना चाहिएजिससे किसानाें घाटा न हाए लेकिन मंडी सचिव की मनमानी ने यहां सारे नियम कानूनों को ताक पर रख दिया है

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